
वैश्विक ज्ञान और तकनीक के संवाद का केंद्र बना श्री गुरु राम राय विश्वविद्यालय, एआई आधारित गवर्नेंस पर विशेषज्ञों ने साझा किए विचार

देहरादून। श्री गुरु राम राय विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ मैनेजमेंट की ओर से शुक्रवार को “एआई इनेबल्ड गवर्नेंस एण्ड सस्टेनेबल डेवलपमेंट” विषय पर एक दिवसीय अन्तर्राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। श्री गुरु राम राय विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ बेसिक एण्ड एप्लाइड साइंसेज ऑडिटोरियम में आयोजित कॉन्फ्रेंस में देश-विदेश के विशेषज्ञों ने आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के बढ़ते प्रभाव, बेहतर गवर्नेंस और सतत विकास की संभावनाओं पर विस्तार से विचार-विमर्श किया। विशेषज्ञों ने कहा कि एआई के माध्यम से शासन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, प्रभावी और जनहितकारी बनाया जा सकता है, लेकिन तकनीकी विकास के साथ अपनी सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक ज्ञान और मानवीय मूल्यों को भी संरक्षित रखना जरूरी है।
कार्यक्रम का शुभारंभ डाॅ. अनिर्बन चक्रवर्ती, प्रोफेसर, स्कूल ऑफ कम्प्यूटेशनल एण्ड इंटीग्रेटिव साइंसेज, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली, प्रो. डाॅ. रजत अग्रवाल, डिपार्टमेंट ऑफ मैनेजमेंट, रुड़की, डाॅ. पूजा जैन, डीन, स्कूल ऑफ मैनेजमेंट एण्ड काॅमर्स स्टडीज, डाॅ दिव्या वर्मा, डाॅ. मोनिका भंगारी, ईशा शर्मा, डाॅ. विनसी पोथन एवं डाॅ. विनय राणा ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि आज आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस केवल तकनीकी क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव शिक्षा, स्वास्थ्य, प्रशासन, कृषि, उद्योग और सामाजिक विकास के विभिन्न क्षेत्रों पर दिखाई दे रहा है।
कॉन्फ्रेंस के मुख्य वक्ता डाॅ. बलराम सिंह, प्रोफेसर एवं डायरेक्टर, बोटूलिनम रिसर्च सेंटर, इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड साइंसेज, यूएसए ने अमेरिका से ऑनलाइन माध्यम से प्रतिभागियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि एआई आधारित तकनीक शासन व्यवस्था में उपलब्ध आंकड़ों के वैज्ञानिक विश्लेषण के माध्यम से बेहतर निर्णय लेने, संसाधनों के प्रभावी उपयोग और नागरिक सेवाओं को अधिक सुलभ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। उन्होंने कहा कि एआई के इस दौर में हमें अपनी ज्ञान परंपरा को भी याद रखना होगा। आयुर्वेद और उपनिषदों में मानव जीवन, प्रकृति, संतुलन और समग्र विकास से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण सिद्धांत मिलते हैं। उन्होंने कहा कि तकनीक का उद्देश्य केवल दक्षता बढ़ाना नहीं, बल्कि मानव कल्याण और समाज के समग्र विकास को सुनिश्चित करना होना चाहिए।
डाॅ. अनिर्बन चक्रवर्ती ने कहा कि एआई इनेबल्ड गवर्नेंस भविष्य की प्रशासनिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार बन सकता है। डेटा आधारित निर्णय प्रणाली से नीतियों को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है और सरकारी सेवाओं की पहुंच को बेहतर किया जा सकता है। हालांकि इसके साथ डेटा सुरक्षा, पारदर्शिता, जवाबदेही और मानव-केंद्रित दृष्टिकोण को प्राथमिकता देना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि तकनीक का वास्तविक लाभ तभी है, जब वह समाज के प्रत्येक वर्ग तक समान रूप से पहुंचे और विकास की प्रक्रिया को समावेशी बनाए।
प्रो. डाॅ. रजत अग्रवाल ने कहा कि एआई आधारित गवर्नेंस प्रशासनिक प्रक्रियाओं को तेज और प्रभावी बनाने के साथ-साथ संसाधनों के बेहतर प्रबंधन में भी मदद कर सकता है। उन्होंने कहा कि सतत विकास केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें शिक्षण संस्थानों, उद्योग, शोध संस्थानों और समाज की समान भागीदारी जरूरी है। गरीबी को कम करना, रोजगार के अवसर बढ़ाना, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना और सामाजिक असमानताओं को कम करना सतत विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
डाॅ. पूजा जैन ने कहा कि सस्टेनेबल डेवलपमेंट का अर्थ केवल पर्यावरण संरक्षण नहीं, बल्कि आर्थिक विकास, सामाजिक समानता, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य, लैंगिक समानता और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करना है। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास के लक्ष्य से दुनिया को गरीबी, भुखमरी, असमानता और पर्यावरणीय चुनौतियों से मुक्त करने की दिशा में साझा वैश्विक लक्ष्य प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि जीरो हंगर का लक्ष्य प्रत्येक व्यक्ति को पर्याप्त और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने से जुड़ा है, जबकि गरीबी उन्मूलन का उद्देश्य आर्थिक अवसरों और सामाजिक सुरक्षा के माध्यम से जीवन स्तर में सुधार करना है। इसी प्रकार गुणवत्तापूर्ण और समावेशी शिक्षा समाज को सशक्त बनाने का आधार है। कॉन्फ्रेंस में विशेषज्ञों ने जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छ जल, स्वच्छ ऊर्जा और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण जैसे विषयों पर भी चर्चा की। विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं की ओर से सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किये गए।
